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महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए थायरॉइड स्क्रीनिंग क्यों ज़रूरी है?
डॉक्टर, क्या यह सिर्फ तनाव है या मेरा थायरॉइड गड़बड़ है?”
यह सवाल डॉक्टरों को लगभग रोज़ सुनने को मिलता है, और यह बिल्कुल जायज़ भी है। आजकल भारत में महिलाओं में थायरॉइड की समस्या इतनी आम हो गई है कि लगभग हर दूसरे या तीसरे व्यक्ति को यह समस्या होती है या वह किसी ऐसे व्यक्ति को जानता है जिसे थायरॉइड की परेशानी है।
Preventive Tests for People with Family History of Disease
Your family’s health history (and the way it has affected their health) can help determine your risk of developing many health conditions. Your family history includes many health issues due to the fact that people are often genetically similar to their family members and also have a similar lifestyle and environment.
PCOS और PCOD में क्या अंतर है? महिलाओं के लिए आसान गाइड
“डॉक्टर… मैं अक्सर PCOS और PCOD के बारे में सुनती हूँ। क्या ये दोनों एक ही हैं या अलग?”
यह सवाल आजकल बहुत सी महिलाओं के मन में होता है। इंटरनेट, सोशल मीडिया और दोस्तों की बातचीत में इन शब्दों का इतना इस्तेमाल होने लगा है कि कई बार यह भ्रम और चिंता पैदा कर देता है।
सच्चाई यह है कि PCOS और PCOD एक जैसे नहीं हैं, हालांकि दोनों का संबंध महिलाओं के हार्मोन और अंडाशय (ovaries) से होता है।
प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी में कार्डियक एमआरआई की भूमिका
हृदय संबंधी रोग (Cardiovascular Diseases) दुनिया भर में बीमारी और मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक हैं। अधिकांश मामलों में ये बीमारियां कई वर्षों में धीरे-धीरे विकसित होती हैं और शुरुआती चरणों में इनके कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। जब तक लक्षण सामने आते हैं, तब तक हृदय को काफी नुकसान पहुंच चुका होता है।
सीबीसी (CBC) टेस्ट क्या है और यह क्यों किया जाता है?
सीबीसी (Complete Blood Count – CBC) टेस्ट सबसे सामान्य और महत्वपूर्ण रक्त जांचों में से एक है, जिसे डॉक्टर नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान करवाने की सलाह देते हैं। यह जांच रक्त में मौजूद विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती है, जिससे डॉक्टर किसी व्यक्ति के संपूर्ण स्वास्थ्य का आकलन कर सकते हैं।
फेफड़ों की जांच के लिए लो-डोज़ सीटी स्कैन की सिफारिश क्यों की जाती है?
फेफड़ों की बीमारियां, विशेष रूप से फेफड़ों का कैंसर, अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के धीरे-धीरे विकसित होती हैं। शुरुआती चरण में फेफड़ों के कैंसर के लक्षण या तो नहीं होते या इतने हल्के होते हैं कि उन पर ध्यान नहीं जाता। जब तक लगातार खांसी, सीने में दर्द या सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तब तक बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है