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Whole Body MRI क्या है और यह कैसे काम करता है?
आज के समय में स्वास्थ्य सेवा केवल बीमारियों के इलाज तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि अब ध्यान बीमारियों की समय से पहले पहचान और रोकथाम पर भी दिया जा रहा है। इसी दिशा में एक अत्याधुनिक जांच है Whole Body MRI।
भारत में कैंसर, न्यूरोलॉजिकल रोग, मेटाबॉलिक समस्याएं और कई “साइलेंट ट्यूमर” तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में लोग चाहते हैं
रोज कितनी सिगरेट से फेफड़ों को नुकसान शुरू हो जाता है?
धूम्रपान दुनिया भर में फेफड़ों की बीमारियों के सबसे बड़े और फिर भी सबसे अधिक रोके जा सकने वाले कारणों में से एक है। इसके बावजूद लाखों लोग हर दिन यह सोचकर सिगरेट पीते हैं कि “दिन में दो-चार सिगरेट से क्या फर्क पड़ेगा?”
MRI या CT स्कैन के दौरान क्लॉस्ट्रोफोबिक (संकीर्ण जगह से डरने वाले) मरीजों के लिए सेडेशन कैसे मदद करता है
“उम… क्या मैं मशीन के अंदर फँसा हुआ महसूस करूंगा?”
“आह… मुझे डर है कि मैं घबरा जाऊँगा।”
“ठीक है, लेकिन… क्या मुझे स्कैन के लिए थोड़ी देर के लिए सुला नहीं सकते?”
हाँ, हम समझते हैं।
सिकुंद डायग्नोस्टिक सेंटर में हम यह पूरी तरह समझते हैं कि MRI या CT स्कैन के कमरे में कदम रखना कई लोगों के लिए असहज या डराने वाला अनुभव हो सकता है।
भारत में डॉक्टर जटिल मामलों में एक्स-रे या अल्ट्रासाउंड की जगह MRI क्यों सुझाते हैं
“हम्म, मैंने तो पहले ही एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड करा लिया था, फिर डॉक्टर ने MRI क्यों लिखी?”
यह एक बहुत आम सवाल है, और बिल्कुल उचित भी।
आखिर दो टेस्ट के बाद तीसरा क्यों?
लेकिन बात यह है कि MRI कोई साधारण स्कैन नहीं है।
यह एक ऐसी तकनीक है जो बिना दर्द, बिना रेडिएशन के, शरीर के भीतर की बेहद बारीक तस्वीर दिखाती है।
यह वैसा ही है जैसे किसी साधारण ड्राइंग की जगह हाई-डेफिनिशन फोटो मिल जाए।
क्या पेसमेकर या इम्प्लांट के साथ MRI करवाना सुरक्षित है
“उम… मेरे पास पेसमेकर है। क्या मैं फिर भी MRI करवा सकता हूँ?”
यही सवाल राहुल ने एक मंगलवार की सुबह सिकुंद डायग्नोस्टिक सेंटर के फ्रंट डेस्क पर पूछा।
उनकी आवाज़ शांत थी, लेकिन उसमें हल्की चिंता झलक रही थी। यह बिल्कुल सामान्य बात है।
लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि अगर किसी व्यक्ति के पास पेसमेकर या किसी भी तरह का मेटल इम्प्लांट है, तो MRI करवाना खतरनाक हो सकता है।
कैंसर की पहचान में MRI: कैसे भारतीय ऑन्कोलॉजिस्ट इसका उपयोग करते हैं उपचार योजना में
“हम्म, कैंसर, यह शब्द ही कितना बड़ा लगता है, है ना?”
पिछले हफ्ते सिकुंद डायग्नोस्टिक सेंटर में MRI करवाते समय हमारी एक मरीज ने यही कहा।
“हाँ, डर तो लगता है… लेकिन अच्छा है कि MRI जैसी तकनीक है जो इसे जल्दी पकड़ सकती है।”
बिलकुल सही कहा।