Sikund Diagnostic Centre

गर्भावस्था में जरूरी स्क्रीनिंग टेस्ट: गर्भधारण से लेकर डिलीवरी तक

Screening Tests in Pregnancy

अगर आपको अभी-अभी पता चला है कि आप गर्भवती हैं, तो सबसे पहले बधाई! वह छोटा सा पॉजिटिव टेस्ट या डॉक्टर की पुष्टि आपके जीवन का एक नया अध्याय शुरू कर देता है। यह समय खुशियों, उम्मीदों और कभी-कभी थोड़ी चिंता से भी भरा होता है।

सिकुंड डायग्नोस्टिक सेंटर में आने वाली लगभग हर होने वाली माँ हमसे एक ही सवाल पूछती है:
“डॉक्टर, गर्भावस्था में कौन-कौन से टेस्ट जरूरी होते हैं और उन्हें कब करवाना चाहिए?”

यह बिल्कुल सही सवाल है। गर्भावस्था सिर्फ इंतजार के नौ महीने नहीं होते, बल्कि यह नियमित जांच, देखभाल और निगरानी का समय भी होता है। यही काम करते हैं स्क्रीनिंग टेस्ट। ये टेस्ट माँ और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य की नियमित जांच करते हैं ताकि हर चरण में यह सुनिश्चित किया जा सके कि सब कुछ ठीक चल रहा है।

आइए गर्भावस्था को तीनों ट्राइमेस्टर के अनुसार समझते हैं और जानते हैं कि किस समय कौन-से टेस्ट जरूरी होते हैं।

Table of Content:

  • पहला ट्राइमेस्टर (1 से 12 सप्ताह): गर्भावस्था की पुष्टि और शुरुआती जांच
  • दूसरा ट्राइमेस्टर (13 से 28 सप्ताह): बच्चे के विकास की विस्तृत जांच
  • तीसरा ट्राइमेस्टर (29 से 40 सप्ताह): बच्चे की वृद्धि और सुरक्षित डिलीवरी की तैयारी
  • कुछ विशेष परिस्थितियों में अतिरिक्त टेस्ट
  • गर्भावस्था में नियमित जांच क्यों जरूरी है?
  • सिकुंड डायग्नोस्टिक सेंटर में आपकी देखभाल
  • अंतिम संदेश




    पहला ट्राइमेस्टर (1 से 12 सप्ताह): गर्भावस्था की पुष्टि और शुरुआती जांच

    गर्भावस्था का पहला चरण सबसे महत्वपूर्ण होता है। इस समय यह सुनिश्चित किया जाता है कि गर्भ सही तरीके से विकसित हो रहा है और माँ का शरीर भी स्वस्थ है।

    1. बीटा hCG टेस्ट

    यह टेस्ट गर्भावस्था की पुष्टि करने के लिए किया जाता है। इसमें खून में ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रॉपिन (hCG) हार्मोन की मात्रा मापी जाती है। इस हार्मोन का स्तर बढ़ना स्वस्थ गर्भावस्था का संकेत देता है।

    2. ब्लड ग्रुप और Rh टाइपिंग

    इस टेस्ट से यह पता चलता है कि माँ का ब्लड ग्रुप Rh-पॉजिटिव है या Rh-नेगेटिव।

    अगर माँ Rh-नेगेटिव और बच्चा Rh-पॉजिटिव हो, तो आगे चलकर समस्या हो सकती है। ऐसी स्थिति में Anti-D इंजेक्शन देकर समस्या को रोका जा सकता है।

    3. CBC (Complete Blood Count)

    इस टेस्ट से हीमोग्लोबिन और रक्त की सामान्य स्थिति की जांच होती है। कई महिलाओं को इसी जांच से पता चलता है कि उन्हें एनीमिया (खून की कमी) है।

    4. थायरॉइड टेस्ट

    थायरॉइड हार्मोन बच्चे के मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए T3, T4 और TSH टेस्ट किए जाते हैं।

    5. संक्रमण की जांच

    कुछ संक्रमण माँ से बच्चे में जा सकते हैं, इसलिए इनकी जांच जरूरी होती है:

    • HIV

    • Hepatitis B और C

    • Syphilis (VDRL)

    • Rubella

    समय पर पहचान होने से इनका इलाज संभव होता है।

    6. यूरिन टेस्ट

    यह टेस्ट निम्न चीजों की जांच करता है:

    • मूत्र संक्रमण

    • शुगर स्तर

    प्रीक्लेम्पसिया के संकेत

    7. पहला अल्ट्रासाउंड (Dating Scan)

    यह अल्ट्रासाउंड आमतौर पर 6 से 8 सप्ताह के बीच किया जाता है। इससे:

    • बच्चे की हार्टबीट की पुष्टि होती है

    • गर्भाशय में गर्भ की सही स्थिति पता चलती है

    • अनुमानित डिलीवरी डेट तय की जाती है

    यही वह पल होता है जब माता-पिता पहली बार स्क्रीन पर अपने बच्चे की हल्की सी धड़कन देखते हैं।

    दूसरा ट्राइमेस्टर (13 से 28 सप्ताह): बच्चे के विकास की विस्तृत जांच

    इस चरण में शरीर गर्भावस्था के साथ सामंजस्य बैठा लेता है और बच्चे का विकास तेजी से होता है। इसलिए कुछ महत्वपूर्ण स्क्रीनिंग टेस्ट किए जाते हैं।

    8. NT स्कैन और ड्यूल मार्कर टेस्ट (11–14 सप्ताह)

    NT स्कैन में बच्चे की गर्दन के पीछे जमा तरल पदार्थ की जांच की जाती है।

    ड्यूल मार्कर ब्लड टेस्ट के साथ मिलकर यह डाउन सिंड्रोम जैसी क्रोमोसोमल असामान्यताओं का जोखिम पता करने में मदद करता है।

    9. एनॉमली स्कैन (Level-II Ultrasound)

    यह स्कैन 18 से 22 सप्ताह के बीच किया जाता है और इसमें बच्चे के सभी अंगों की जांच होती है:

    • दिल

    • मस्तिष्क

    • रीढ़

    • हाथ-पैर

    • आंतरिक अंग

    इसके साथ प्लेसेंटा और एमनियोटिक फ्लूड की भी जांच होती है।

    10. ट्रिपल या क्वाड मार्कर टेस्ट

    अगर पहले ड्यूल मार्कर टेस्ट नहीं हुआ हो, तो यह टेस्ट किया जाता है। इससे जेनेटिक असामान्यताओं और न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट का जोखिम पता चलता है।

    11. ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट (GTT)

    यह टेस्ट 24 से 28 सप्ताह के बीच किया जाता है और इससे गर्भावस्था में होने वाले डायबिटीज का पता चलता है।

    12. दोबारा ब्लड और यूरिन टेस्ट

    इस समय डॉक्टर CBC, LFT, KFT और यूरिन टेस्ट दोबारा करवाने की सलाह दे सकते हैं ताकि माँ के शरीर के महत्वपूर्ण अंगों की स्थिति ठीक रहे।

    तीसरा ट्राइमेस्टर (29 से 40 सप्ताह): बच्चे की वृद्धि और सुरक्षित डिलीवरी की तैयारी

    गर्भावस्था के अंतिम चरण में बच्चे की वृद्धि और प्रसव की तैयारी पर ध्यान दिया जाता है।

    13. ग्रोथ और डॉपलर अल्ट्रासाउंड

    इस स्कैन से पता चलता है:

    • बच्चे का वजन और स्थिति

    • प्लेसेंटा की स्थिति

    रक्त प्रवाह और ऑक्सीजन सप्लाई

    14. ग्रुप B स्ट्रेप्टोकोकस (GBS) टेस्ट

    यह टेस्ट 35 से 37 सप्ताह के बीच किया जाता है। यह एक बैक्टीरिया की जांच करता है जो माँ के लिए सामान्य हो सकता है लेकिन बच्चे के लिए हानिकारक हो सकता है।

    अगर यह पॉजिटिव आता है तो डिलीवरी से पहले एंटीबायोटिक देकर जोखिम कम किया जाता है।

    15. अंतिम ब्लड टेस्ट

    डिलीवरी से पहले डॉक्टर CBC और ब्लड ग्रुप दोबारा जांच सकते हैं ताकि प्रसव के लिए पूरी तैयारी सुनिश्चित हो सके।

    कुछ विशेष परिस्थितियों में अतिरिक्त टेस्ट

    कुछ महिलाओं को मेडिकल हिस्ट्री या उम्र के कारण अतिरिक्त जांच की जरूरत हो सकती है, जैसे:

    • NIPT (Non-Invasive Prenatal Testing)

    • थैलेसीमिया स्क्रीनिंग

    • TORCH टेस्ट

    • एम्नियोसेंटेसिस

    इनकी सलाह डॉक्टर जरूरत के अनुसार देते हैं।

    गर्भावस्था में नियमित जांच क्यों जरूरी है?

    गर्भावस्था जीवन का बहुत संवेदनशील और महत्वपूर्ण समय होता है। समय-समय पर जांच कराने से कई समस्याओं को शुरुआती चरण में ही पहचान लिया जाता है, जैसे:

    • गर्भावधि डायबिटीज

    • थायरॉइड असंतुलन

    • बच्चे की वृद्धि से जुड़ी समस्याएँ

    जल्दी पहचान होने से इनका इलाज आसान हो जाता है।

    सिकुंड डायग्नोस्टिक सेंटर में आपकी देखभाल

    सिकुंड डायग्नोस्टिक सेंटर में हर जांच सटीकता, आधुनिक तकनीक और संवेदनशील देखभाल के साथ की जाती है।

    हमारी सुविधाएँ:

    • उन्नत अल्ट्रासाउंड और लैब तकनीक

    • अनुभवी रेडियोलॉजिस्ट और पैथोलॉजिस्ट

    • स्पष्ट और तेज रिपोर्ट

    • मरीज-केंद्रित सेवा

    हमारा उद्देश्य सिर्फ टेस्ट करना नहीं, बल्कि हर होने वाली माँ को विश्वास और सही जानकारी देना है।

    अंतिम संदेश

    गर्भावस्था एक सुंदर यात्रा है। हर टेस्ट, हर स्कैन और हर रिपोर्ट आपको अपने बच्चे से मिलने के एक कदम और करीब ले जाती है।

    इन जांचों का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि आप और आपके बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

    अगर आपको किसी भी टेस्ट को लेकर सवाल हों, तो सिकुंड डायग्नोस्टिक सेंटर में आकर विशेषज्ञों से सलाह लें। हम गर्भधारण से लेकर डिलीवरी तक हर कदम पर आपके साथ हैं।

    क्योंकि हमारे लिए यह सिर्फ जांच नहीं, बल्कि आपकी कहानी और आपके आने वाले नन्हे जीवन की शुरुआत है।

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